सुबह क्या इस तरह बदलेगी !!


सुबह क्या इस तरह बदलेगी,
कोई तो एक पैगाम लाओ।
मुनासिब नहीं होगा,
यूं लफ़्ज़ों का ख़ाली जाना।
आरे कोई तो, 
इस नए सहर में नया इल्ज़ाम लाओ।।

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