Saal ka pegaam akhri

इस साल का ये पैगाम आखरी ,
इस साल का ये दिन आखरी ,
इस साल की ये बात आखरी ,
इस साल ये सलाम आखरी। 
पर ,
हम नहीं है आखरी ,
तुम नहीं हो आखरी ,
हम दोनों के जज़्बात नहीं है आखरी ,
और ,
हम दोनों की ये मुलाकात नहीं है आखरी। 
:-Bajrang Bhagat

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